Monday, 17 January 2011

महंगाई की मार

जब सरकार ही महंगाई के सामने घुटने टेक चुकी है तो फिर आपकी और हमारी क्या बिसात... लगातार छह महीने से महंगाई से परेशान जनता की सुध अब सरकार लेगी। महंगाई के पीछे सरकार की दलीलें कुछ इस तरह की है कि खुद महंगाई भी शर्म से पानी पानी हो जाए।
सरकार यानी पालनहार, जनता सरकार इसलिए चुनती है कि उसके हितों की रक्षा हो। चुनाव से पहले जनहित के वायदे किये जाते हैं पर सरकार बनते ही ये सारे वायदे कोरे हो जाते हैं। आम आदमी बेतहाशा बढ़ती महंगाई से बेहाल है और सरकार है कि बयान बाजी से लोगों का पेट भर रही है। सरकार का मानना है कि बढ़ती महंगाई के लिए लोग ही जिम्मेदार हैं। प्रणब मुखर्जी का मानना है आप ज्यादा खाते हैं इसलिए महंगाई ज्यादा बढ़ रही है। यही नहीं सरकार कह रही है लोगों की जेब में बढ़ गया है पैसा.. यानी आपकी जेब पहले के मुकाबले ज्यादा वजनी हो गई है... सरकार का मानना है कि लोगों की आमदनी बढ़ने से बढ़ी है महंगाई।
एक अनुमान के मुताबिक, 2008 के बाद से अब तक लोगों की आमदनी बढ़ी 5-10%। लेकिन हम आपको बता दें कि 2008 के बाद महंगाई करीब 30 परसेंट बढ़ी है।
अगर आमदनी बढ़ने से मांग बढ़ी है तो फिर पांच या दस परसेंट ही महंगाई भी बढ़नी चाहिए थी... सरकार अब अर्थव्यवस्था में तेजी को भी बढ़ती महंगाई का जिम्मेदार मानती है... सरकार ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार के कारण ही दूध, अंडा, मछली, मीट महंगा हुआ है। और तो और पूरी तरह मॉनसून पर आधारित खेती प्रधान देश में सरकार का बयान है कि बारिश के कारण फसल बर्बाद हुई जिससे महंगाई बढ़ी है। पहले बारिश नहीं हुई तो महंगाई बढ़ी और अब बारिश हुई तो महंगाई बढ़ी। सरकार ने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने का एलान कर चुकी है...
सरकार ने ऐलान किया है कि इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पॉलिसी की समीक्षा होगी.. वहीं जरूरी कमोडिटीज की समीक्षा की भी घोषणा की गई है। सरकार जनता की प्राथमिकता से बेखबर है या लापरवाह यह एक सवाल है। साल 2010-11 को केन्द्रीय बजट पर नजर डाले तो सरकार ने तमाम चीजों की कीमत घटाई जो विलासता की हैं। बढ़ने वाले मूल्यों में सिगरेट और तंबाकू जिससे सरकार की आय होती, जिसके बढ़ने का विरोध नहीं किया जाता इसे छोड़ दिया जाये तो वे तमाम चीजें हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है।
 पिछले एक साल में कीमतों पर नजर डालें तो प्याज 182 परसेंट महंगा हुआ है.. वहीं सब्जियां और तेल की कीमत भी  70 परसेंट तेज हुई। इसके बावजूद सरकार महंगाई के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने में लाचार दिख रही है।

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