Monday, 17 January 2011

सरकार का दावा-वादा सब धराशायी हो चुका है। सरकारी आंकड़ों में खाने-पीने के सामान पिछले छे महीने से 15 परसेंट से ज्यादा की रफ्तार से महंगे हो रहे हैं। दूसरे जरूरी सामानों के भी महंगे होने की रफ्तार इससे कम नहीं है। दिसंबर की कुल महंगाई दर भी फिर से बढ़कर दस परसेंट की तरफ जाती दिख रही है।
सरकारी की ओर से महंगाई को काबू में करने चाहे कितने ही वादे किए जा रहे हों लेकिन महंगाई है कि कम होने का नाम नहीं ले रही है।
 दिसंबर महीने में महंगाई दर के आंकड़े बढ़कर 8.43 परसेंट पर पहुंच गई है। वहीं नवंबर में महंगाई 7.48 फीसदी पर थी।
दिसंबर में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर भी बढ़कर 16.46 फीसदी पर पहुंच गई है। नवंबर में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 13 फीसदी पर थी। दिसंबर में मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर में हल्की गिरावट देखने को मिली है और ये घटकर 4.46 फीसदी पर आ गई है। इसके अलावा मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दिसंबर में फ्यूल ग्रूप की महंगाई दर बढ़कर 11.19 फीसदी पर पहुंच गई है। हालांकि दिसंबर में कमोडिटीयों के 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दिसंबर में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य कीमतों का सूचकांक 13.55 फीसदी रहा। बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। इस बात का गवाह है महंगाई दर के आंकड़े। सरकार की ओर से महंगाई को काबू में करने चाहे कितने ही वादे किए जा रहे हों लेकिन महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। हालांकि महंगाई कम करने के तमाम सरकारी कोशिशें अब तक नाकाम साबित हुई है। लेकिन फिर भी वित्त मंत्री को उम्मीद है कि आने वाले समय में महंगाई जरूर कम होगी। लेकिन हम आपको याद दिला दें की वित्त मंत्री को महंगाई कम होने की उम्मीद पिछले एक साल से है... लेकिन ये महंगाई ही है जो कम होने का नाम नहीं लेती।

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