Monday, 31 January 2011

केरोसिन की कालाबाजारी

बॉलीवुड की रंगीन चमचमाती दुनिया में टैक्स चौरी से काले धन की कालिख मजबूत हो रही है तो, दूसरे धंधों में भ्रष्टाचार से काले धन की कालिख बढ़ रही है। केरोसिन जो, कम कमाई वाले लोगों के लिए सब्सिडी पर बेचा जाता है। उसके काले मुनाफे में इतनी ताकत थी कि एक बेईमान धंधेबाज ने एक ईमानदार अधिकारी को जिंदा जला दिया। अब सरकार जागी है और छापे-गिरफ्तारी कर रही है। जबकि, ये रहस्य सब जानते हैं कि केरोसिन की कालाबाजारी हजारों करोड़ की अलग अर्थव्यवस्था है जिसमें सबका अपना हिस्सा है।
देश में हर महीने 93 करोड़ लीटर केरोसिन बिकता है।  एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार द्वारा मुहैया 40 परसेंट केरोसिन कालाबाजारियों के हाथों में चला जाता है। नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हमारे पड़ोसी देशों में केरोसीन की कीमतें पेट्रोल-डीजल की कीमतों के लगभग बराबर है। इसलिए सरकारी तेल डिपो व टैंकरों से चुराया गया केरोसिन तस्करी के जरिए इन देशों में महंगे दाम पर बेच दिया जाता है। एसोचेम के एक सर्वे के अनुसार हर साल सौ करोड़ लीटर केरोसिन की तस्करी हो रही है। इससे सरकार को हर साल 3395 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। केंद्र सरकार की ओर से आम आदमी को मुहैया कराए गए सस्ते केरोसिन का आधा हिस्सा मिलावटखोरों और तस्करों के हाथ लग जाता है।  सरकार केरोसिन पर हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देती है जबकि राशन की दुकानों पर हर साल 13 हजार 950 करोड़ रुपए का केरोसिन बिकता है। सब्सिडी में यह रकम जोड़ें तो राशि करीब 34 हजार करोड़ रुपए होती है। यदि बिना सब्सिडी केरोसिन बेचा जाता तो तेल कंपनियों को यह रकम मिलती। यानी यह केरोसिन की वास्तविक कीमत है जो प्रति लीटर 30.42 रुपए है। सब्सिडी में मिली छूट की वजह से राशन की दुकान पर केरोसिन साढ़े बारह रुपए प्रति लीटर पड़ता है। जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमत इससे कई गुना ज्यादा हैं। तेल माफिया पेट्रोल-डीजल में सस्ते केरोसिन की मिलावट कर दाम में फर्क का फायदा उठाता है।सस्ते केरोसिन का 40 फीसदी हिस्सा कालाबाजारी ले उड़ते हैं जबकि 10 फीसदी तस्करी के जरिए पड़ोसी देशों में बेच दिया जाता है। इससे एक तरफ जहां आम आदमी से सस्ता केरोसिन दूर हो रहा है, वहीं सरकार को सालाना करीब 17000 करोड़ रुपए का नुकसान भी हो रहा है। मिलावटखोरी का यह धंधा देश में तेजी से फैल रहा है और इस पर जल्द से जल्द लगाम लगाना जरूरी है।

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