सरकार कह रही है कि हमारी-आपकी जेब में पैसा बढ़ने की वजह से महंगाई बढ़ रही है। लेकिन, हमारी-आपकी जेब में आया पैसा कितना बढ़ा है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि उद्योगों की बढ़ने की रफ्तार तीन परसेंट से भी कम रह गई है।यानी वो, उद्योग जो हमारी-आपकी जरूरत का सामान बनाते हैं उन्हें खरीदने वाले कम हो गए हैं। फिर भी सरकार कह रही है अर्थव्यवस्था में तेजी से महंगाई आई है।
देश के तेजी से आर्थिक विकास की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। नवंबर महीने के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों ने सभी को निराश कर दिया है।
उस महीने इसकी विकास दर महज 2.7 परसेंट थी जबकि अक्टूबर में यह 11.29 परसेंट थी और पिछले साल यह 11.3 परसेंट थी। लेकिन राजधानी दिल्ली में योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने कहा कि इन आंकड़ों से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से नवंबर के बीच औद्योगिक विकास की दर 9.5 रही जबकि इसके पिछले साल की इसी अवधि में यह 7.4 प्रतिशत थी।
इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आईआईपी आंकड़ों का गिरना चिंताजनक है और इसके रिकवरी के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि नवंबर में कैपिटल गुड्स की ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है और ये 12.8 फीसदी रही, जबकि पिछले साल नवंबर में कैपिटल गुड्स की ग्रोथ 11 फीसदी रही थी। मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में भी गिरावट दर्ज की गई है और ये नवंबर में 2.3 फीसदी रही। पिछले साल नवंबर में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 12.3 फीसदी पर थी।
माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ भी नवंबर महीने में घटकर 6 फीसदी पर आ गई है, जबकि पिछले साल इसी महीने में माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 10.7 फीसदी थी। हालांकि इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ में तेजी दर्ज की गई है। नवंबर में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ 4.6 फीसदी ही और पिछले साल की समानअवधि में इस सेक्टर की ग्रोथ 1.8 फीसदी रही थी। नवंबर महीने में कंज्यूमर गुड्स की ग्रोथ निगेटिव रही है और ये इस दौरान -3.1 फीसदी हो गई है। 2010 में नवंबर महीने में कंज्यूमर गुड्स की ग्रोथ 10.1 फीसदी रही थी। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ में भी जबरदस्त गिरावट आई है। नवंबर में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की ग्रोथ 4.3 फीसदी रही, जबकि पिछले साल इसकी ग्रोथ 36.3 फीसदी रही थी। वहीं नवंबर में औद्योगिक विकास में गिरावट आने से आरबीआई के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। अब महंगाई कम करने के साथ-साथ आर्थिक विकास बनाए रखने की दोहरी जिम्मेदारी आरबीआई पर है। इस महीने रिजर्व बैंक अपने का एलान करने वाला है माना जा रहा है कि इस बार आरबीआई ब्याज दरों में इजाफा कर सकती है।
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