Monday, 17 January 2011

पेट्रोल का क्या है विकल्प

पेट्रोल के बढ़ते दाम से लोग परेशान हैं... वहीं इसका इस्तेमाल जहां एक ओर बढ़ रहा है... तो दूसरी ओर इसके अधिक इस्तेमाल से इसका भंडार खत्म होने के कगार पर है... अब जरूरत ये है कि इसका विकल्प खोजा जाए क्योंकि, पेट्रोलियम भंडार खत्म होने से पहले इसका विकल्प नहीं खोजा गया तो, दुनिया के फिर से बैलगाड़ी युग में जाने का खतरा पैदा हो सकता है। हमारी ये खास रिपोर्ट बता रही है कि आखिर क्या हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल के विकल्प


भारत में फिलहाल करीब 19 साल का तेल भंडार बचा हुआ ... यही नहीं दुनियाभर में भी 26 साल का तेल का भंडार बाकी है... तो क्या एक बार फिर हम बैलगाड़ी युग में चले आएंगे... अगर नहीं तो आखिर कैसे चलेगी हमारी गाड़ी... इसपर सभी देशों की चिंता बनी हुई है... तभी तो वैज्ञानिक पेट्रोल और डीजल के विकल्प पर ध्यान दे रहे हैं...
डीजल और पेट्रोल का एक विकल्प है सीएनजी... हालांकि सीएनजी ज्यादातर जगहों पर फिलहाल इस्तेमाल नहीं हो रहा है.. सीएनजी सस्ता होने के साथ साथ प्रदूषण भी नहीं फैलाता है... हालांकि सीएनजी फिलहाल सभी शहरों में नहीं मिल पाता है... लेकिन सरकार इसे वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल जरूर कर सकती है.....
सीएनजी के बाद  डीजल और पेट्रोल का दूसरा विकल्प एलपीजी हो सकता है... हालांकि गाड़ियां इसपर चलती जरूर हैं... पर इससे इसके कालाबाजारी का खतरा बढ़ जाता है... यही नहीं एलपीजी सिलिंडर के फटने का भी हमेसा खतरा बना रहता है...
पेट्रोल का एक विकल्प एथेनॉल भी है... लेकिन ये पेट्रोल के साथ मिक्स करने पर ही बेहतर काम करता है... पेट्रोल के इस्तेमाल को कम करने के लिए सरकार एथेनॉल मिक्स्ड पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकती है... एथेनॉल गन्ने से निकाला जाता है... इसलिए ये आसानी से मिल भी जाती है... पेट्रोल में करीब दस परसेंट एथनॉल मिक्स किया जाता है....
वहीं पेट्रोल की खपत को कम करने के लिए बायोडीजल का इस्तेमाल किया जा सकता है... बायोडीजल भी प्रदूषण पर रोक में मदद करता है ... बायोडीजल ज्यादातर जटरोफा के पेड़ से निकाला जाता है....
यही नहीं सरकार हाइड्रोजन के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे सकती है... अब धीरे-धीरे कार बनाने वाली कंपनियां ऐसी कार बना रही हैं... जो  हाइड्रोजन से चलती हैं
इन सबके अलावा बैट्री से चलने वाली गाड़ियां भी इन दिनों काफी इस्तेमाल हो रही हैं... मोटरसाइकिल से लेकर कार तक बैट्री से चलाए जाते है...
पेट्रोल और डीजल पर भले ही चिंता बरकरार हो... लेकिन, सरकार फिलहाल इसके इस्तेमाल को कम करने के तरीके के बारे में नहीं सोच रही है...क्योंकि, तेल के भंडार तो सीमित हैं... इसलिए और भी जरूरी हो गया है कि डीजल और पेट्रोल के विकल्प को जल्द से जल्द ढ़ूंढ़ा जाए।

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