सरकार ने कच्चे तेल की कीमतों का हवाला देकर 25 जून को पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ा दी। जबकि, इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें बिल्कुल नहीं बढ़ीं थीं। लेकिन, सरकार ने तेल कंपनियों के घाटे का हवाला देकर हमारी-आपकी जेब हल्की करने का फैसला कर डाला। नतीजा साफ था.. सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी महंगाई का मुंह और खुल गया.. और ये पूरे साल डबल डिजिट में ही बना रहा। दरअसल हमें कच्चा तेल महंगा नहीं मिल रहा है सच्चाई ये है कि सरकार जनता को धोखे में रख रही है। हमें मिलने वाला पेट्रोल-डीजल इसलिए महंगा नहीं है कि तेल कंपनियों का घाटा बढ़ता जा रहा है। दरअसल सरकार हमें इतने टैक्स लगाकर पेट्रोल-डीजल बेच रही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत करीब दोगुनी हो जाती है। सरकार तेल मार्केटिंग कंपनियों के घाटे का हवाला देकर बार-बार पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने की कोशिश में लगी रहती है। सरकार हमें बता रही है कि जब हम अपनी अपनी जिंदगी की गाड़ी चलाते हैं, अपनी रसोई बनाते हैं तो मजबूर सरकार को हमें कितनी खैरात यानी सब्सिडी देनी पड़ती है। लेकिन सरकार ने पेट्रोलियम कीमतों के पूरे मसले पर एक मुद्दे को बड़े चुपके से किनारे कर रखा है। यह मुद्दा है पेट्रोल-डीजल पर वसूला जाने वाले तमाम ड्यूटी का। किरीट पारिख समिति ने भी इस मुद्दे को जरा भी नहीं छेड़ा। आपको समझाया जा रहा है कि जब आप 1 लीटर पेट्रोल खरीदते हैं तो उस पर तेल कंपनी को 3 रुपये का घाटा होता है... क्योंकि वह लागत से कम कीमत आपसे ले रही है। लेकिन आपको यह नहीं बताया जा रहा है कि आप उस 1 लीटर के लिए जो करीब 60 रुपये दे रहे हैं, उसका करीब आधा हिस्सा सरकारी खजाने में जा रहा है .... कुछ केंद्र सरकार के हिस्से में, कुछ राज्य सरकार के हिस्से में। तेल कंपनियों का घाटा तो कीमत बढ़ाने के बाद भी पूरा नहीं निपटेगा... अब ग्राहक ने तो 1 लीटर के 60 रुपये दे दिये। उसमें से तेल कंपनी को केवल 30 रुपये मिले और बाकी हिस्सा सरकार ने रख लिया तो इसमें ग्राहक की क्या गलती है। अगर तेल कंपनी को 3 रुपये का घाटा हो रहा है तो सरकार टैक्सी घटा कर वह पैसा तेल कंपनी को दे दे। आपको समझाया जा रहा है कि आपकी गाड़ी सरकारी खैरात पर चल रही है। लेकिन आपको यह नहीं बताया जा रहा है कि सरकार को मिलने वाले एक्साइज का आधा हिस्सा पेट्रोलियम पदार्थों से मिलता है। आम जनता को अगर सरकार सचमुच में राहत देना चाहती है तो उसे चाहिए कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स को कम करे। भारत में लगातार बढ़ती पेट्रोल की कीमतें चिंता का कारण बनी हुई है.. आखिर हो भी क्यों न... पेट्रोल और डीजल की कीमत ये ही करीब सभी चीजों के सामान की कीमत जो तय होती है... दरअसल एक लीटर पेट्रोल की कीमत उतनी नहीं है जितना आप अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं... सरकार भले ही अंतर्राष्ट्रीय कीमतों का ढ़िढ़ोरा पीट पीट कर ये जताने की कोशिश कर रही हो कि नवरत्न कंपनियों को बचाने के लिए कीमत में इजाफा ही एक मात्र तरीका बचा था... तो ये सच्चाई नहीं है... दरअसल सरकार पेट्रोल पर भारी टैक्स लगाती है... जिससे भर रहा है सरकारी खजाना.... ये है तेल के खेल का असली गणित यानी सरकार हमारी जेब से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर सीधे रास्ते से तो वसूली कर ही रही है। चुपके से ढेर सारा टैक्स थोपकर भी हमारी जेब से पैसा निकालने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।
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