Monday, 17 January 2011

भारत के योद्धा

आंखे ऊंची कर देख शिखर, हथियार उठा, तु दिखा हुनर.....
मुट्ठी में है तेरी ताकत, दुश्मन की लाई है आफत
तू लगा दांव, तू लगा दांव, तू लगा दांव, तू लगा पेंच
तू दिखा तेज, तू दिखा तेज,
लाखों धड़कन की जान है तू,
लाखों दिन की शान है तू
तू लगा जोर, तू लगा जोर,
तू मचा शोर
इक महावीर संतान है तू
न देश युद्ध, न धर्म युद्ध
ये है घरती पर कर्मयुद्ध कर्मयुद्ध कर्मयुद्ध कर्मयुद्ध
टीम इंडिया के उन 15 खिलाड़ियों का चयन हो गया है जो भारत की दावेदारी पेश करेंगे। किन खिलाड़ियों को इसका जिम्मा सौंपा गया है...
महेंद्र सिंह धोनी
टीम इंडिया के अब तक के सबसे बेहतरीन कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी पर वो जिम्मेदारी है जिससे देश में धर्म कहे जाने वाले क्रिकेट के खेल से जुड़ी है। बेहतरीन कप्तानी रिकॉर्ड के साथ माही ने अपने बल्लेबाजी से भी निराश नहीं किया है। हालांकि उन्होंने पिछले 12 महीनों वैसी आतिशी पारियां नहीं खेली हैं जिनके लिए वे जाने जाते हैं लेकिन विषम परिस्थितियों में जिस सूझबूझ के साथ उन्होंने बल्लेबाजी और टीम की कप्तानी की है ऐसे में उनसे उम्मीदें रखना गलत नहीं होगा।
वीरेन्द्र सहवाग
वीरू के आक्रमक तेवर किसी भी गेंदबाज का रिकॉर्ड खराब करने की क्षमता रखते हैं। वीरू यदि शुरुआती 10 ओवर भी क्रीज पर जम जदाएं तो मैच का रुख भारत की ओर मुड़ना निश्चित है। वनडे करियर में 100 का स्ट्राइक रेट अपने आप में एक अनूठा कीर्तिमान है, जो वीरू के नाम है।
सचिन तेंदुलकर
मास्टर ब्लास्टर के बिना भारत में केले जाने वाले इस विश्वकप की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मास्टर ब्लास्टर भले ही चोटिल होने के कारण साउथ अफ्रीका के खेले जा रहे वनडे सीरीज के बीच से स्वदेश लौट गए हैं फिर भी भारतीय महाद्वीप में उनके प्रदर्शन पर किसी तरह का सवाल का नहीं उठता। भारतीय टीम की वर्ल्ड कप जीतने की दावेदारी में सबसे अहम भूमिका क्रिकेट के भगवान की ही होगी।
गौतम गंभीर
सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर को पिछले 5 सालों में भारतीय टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विश्व कप के हर मैच में सहवाग के साथ गौती की जोड़ी का खरा उतरना भारत के लिए बहुत जरूरी है।
युवराज सिंह
युवी को यूं ही देश का सबसे प्रतिभाशाली क्रिकेटर नहीं कहा जाता। जोहानिसबर्ग वनडे मुकाबले में फॉर्म में वापसी करते हुए युवराज ने टीम चयन से ठीक पहले यह साबित कर दिया था कि वे अब भी भारत के मध्यक्रम बल्लेबाजी की जान हैं। बेहतरीन फिल्डर होने के अलावा भारतीय उपमहाद्वीप की धीमी पिचों पर उनकी गेंदबाजी भी टीम के काम आएगी।
यूसुफ पठान
10 गेंदों के अंदर बॉलरों की बखिया उधेड़ने वाले इस विस्फोटक बल्लेबाज ने न्यूजीलैंड के खिलाफ शतकीय पारी के दौरान अपनी वही छवि दिखाई जिसके लिए वे घरेलू क्रिकेट में मशहूर हैं। हालांकि उनकी बल्लेबाजी में भी कई तकनीकी खामियां भी हैं लेकिन उनका घरेलू पिचों का अनुभव टीम के लिए फायदेमंद का साबित हो सकता है।
विराट कोहली
IPL और अंडर-19 वर्ल्ड कप में अपने अच्छे प्रदर्शन के बल पर टीम इंडिया में जगह बनाने वाले दिल्ली के इस बल्लेबाज ने चयनकर्ताओं को फैसले को सही साबित किया है। प्वांइट क्षेत्र में बेहतरीन फील्डर होने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पार्ट टाइम गेंदबाज के भूमिका भी निभा सकते हैं कोहली।
सुरेश रैना
निचले मध्यक्रम में तेज गति से रन बनाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पारी संभालने के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के इस बल्लेबाज से वर्ल्ड कप में भी बहुत उम्मीदें हैं। साउथ अफ्रीका के बाउंसी विकेटों पर भले ही उनकी तकनीकी खामियां उजागर हुईं हैं लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में परिस्थितियां दूसरी होंगी जो उनके बल्लेबाजी के अनुकूल है।
हरभजन सिंह
भारतीय उपमहाद्वीप की धीमी पिचों पर किसी गेंदबाज से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है तो उसमें हरभजन सिंह का नाम सबसे आगे है। क्योंकि उनकी फिरकी का जादू चलने के लिए जैसी परिस्थितियों की जरूरत है वर्ल्ड कप के दौरान कुछ ऐसी ही अनुकूल पिचें मिलेंगी। इसके अलावा हालिया दिनों उनकी बल्लेबाजी जबरदस्त सुधार देखने को मिला जो टीम के लिए शुभ संकेत हैं।
जहीर खान
गेंदबाजी आक्रमण की कमान जहीर खान के मजबूत कंधों पर है। भले ही वे अन्य तेज गेंदबाजों की तरह अपने गेंद की गतियों से बल्लेबाजों का परेशान न करते हों पर चतुराई के मामले उनका कोई जवाब नहीं है। इनस्विंगर, आउट स्विंगर, ऑफ कटर, लेगकटर, धीमी गेंद और बाउंसर, उनकी तरकश इतने तीर हैं जो किसी भी बल्लेबाज का रिकॉर्ड खराब कर दे।
मुनाफ पटेल
तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल भारतीय टीम के लिए बेशक कुछ ज्यादा मैच न खेल सके हों लेकिन वर्ल्ड कप में उनका जोश सीनियर खिलाड़ियों के साथ टीम को आगे ले जाने में मददगार साबित होगा।
आशीष नेहरा
आशीष नेहरा को इस बार विश्वकप की टीम में चौथे गेंदबाज के रूप में चुना गया है। नेहरा का अनुभव टीम की गेंदबाजी को धार देने में सहायक सिद्ध होगा।
प्रवीण कुमार
चोटिल होने की वजह से साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज नहीं खेल पाने वाले प्रवीण कुमार आज की तिथि में टीम के सबसे बेहतरीन स्विंग गेंदबाज हैं। उनकी गेंदबाजी में ज्यादा गति देखने को नहीं मिलती लेकिन वे जिस कसी हुई लाइन-लेंग्थ में गेंदबाजी करते हैं। उस पर विपक्षी टीम के बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान नहीं होता।
पीयूष चावला
एक अच्छा स्पिनर होने के बावजूद अभी तक टीम इंडिया से बाहर और अंदर होते रहे पीयूष के युवा कंधो पर अनुभवी हरभजन के साथ मिलकर देश की स्पिन गेंदबाजी को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।
आर अश्विन
अब तक IPL में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवा चुके आर अश्विन ने कई सीनियर खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए टीम में स्थान हांसिल किया है। इससे उनके बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

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