आखिर क्यों बढ़ती है महंगाई? ये एक सवाल है जो आज कल आम आदमी को अंदर ही अंदर खाए जा रही है। सरकार की मानें तो आप ज्यादा खाना खा रहे हैं इसलिए महंगाई बढ़ रही है।
अब आप खाना खाना भूल ही जांए तो ही महंगाई से निजात मिल पाएगी। ये हम नहीं कह रहे हैं.. ये कहना है खुद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का। वित्त मंत्री का साफ मानना है कि आप और हम यानी कॉमन मैन जितना खाना खाएंगे उतनी ही महंगाई बढ़ेगी। सरकार ने महंगाई पर जितने तीर छोड़े, वे सब महंगाई का ही शिकार हो गए। सरकार ने गुरुवार को फूड इंफ्लेशन को काबू करने के लिए कई उपायों का एलान किया, लेकिन अपनी दयनीय हालत दिखाते हुए यह भी कह दिया कि सब्जियों और फलों के कुलांचे मारते दाम नियंत्रित करने के लिए उसके पास सीमित हथियार हैं। दरअसल, महंगाई दर में आए उछाल के मौजूदा दौर को फल-सब्जियों की उफान मारती कीमतों से ही सहारा मिला है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार नियमित रूप से सभी आवश्यक कमोडिटी के निर्यात और आयात की समीक्षा करेगी और जमाखोरों और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को दाल और खाद्य तेल जैसे आवश्यक चीजों की खरीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि रीटेल आउटलेट पर कम दरों पर उनका डिस्ट्रीब्यूशन किया जा सके। सरकार ने नेफेड से प्याज 35 रुपए प्रति किलोग्राम पर बेचने को भी कहा। महंगाई दर में इतनी बढ़ोतरी के पीछे प्याज के दामों में आई तेजी काफी हद तक जिम्मेदार है। सरकार महंगाई को काबू करने में अब सीधे अपनी लाचारी जाहिर कर रही है। उसने कहा कि खाद्य कीमतों को लंबे वक्त तक नियंत्रण में रखने का एकमात्र समाधान कृषि उत्पादकता बढ़ाना है।
पीएमओ की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, इंफ्लेशन की हालिया तेजी सब्जियों और फलों के दामों में आने वाली बढ़ोतरी की वजह से है, जिन्हें संभालना काफी मुश्किल है, क्योंकि ये कमोडिटी सरकारी स्टॉक में नहीं रखी जातीं।' सरकार ने महंगाई दर काबू में करने के लिए मध्यम से लंबी अवधि के कई उपाय सुझाए। सरकार ने कहा कि उसने किसान मंडी और मोबाइल बाजार बनाने की योजना तैयार की है। वह राज्यों से मंडी टैक्स, चुंगी और अन्य स्थानीय शुल्क हटाने पर विचार करने को भी कहेगी, ताकि आवश्यक कमोडिटी की आवाजाही में आसानी हो। लंबी अवधि के उपायों पर जोर इसलिए दिया जाने लगा है क्योंकि अब यह महसूस किया जा रहा है कि खाद्य मुद्रास्फीति दर लंबी अवधि का ढांचागत मुद्दा न बन जाए। वहीं मौद्रिक मोर्चे पर पेंच कसने से भी इस समस्या से निजात मिलती नहीं दिख रही। आरबीआई के कदमों से तो बैंक लोन पहले ही महंगे हो गए हैं.. इसमें और बढ़ोत्तरी से बैंकों के सामने मुश्किलें खड़ी हो जाएगी। सरकारी बैठक और बयानबाजी के बाद जो फैसला लिया गया है.. उससे ये साफ जाहिर है कि बढ़ती महंगाई से अगले छह महीनों तक आपको निजात नहीं मिलने वाली है। सरकार महंगाई पर काबू पाने के लिए जितने कदम उठाने का घोषणा कर रही है.. ये सब या तो लांग टर्म है या फिर मिड टर्म। और इन कदमों का असर आने वाले छह महीनों में नहीं दिखने वाला... हां अपने किचन के बजट को आप अगर नहीं बिगाड़ना चाहते हैं तो आप खाना कम जरूर कर सकते हैं।
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