अन्ना हजारे का अनशन जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे काफिला जुड़ता गया। दिल्ली के रामलीला मैदान और इंडिया गेट पर जनसैलाब उमड़ा। देश के कोने-कोने से अन्ना हजारे के समर्थन में लोग एकजुट हो रहे हैं। वहीं भ्रष्टाचार के विरोध में सिमरी बख्तियारपुर की दो महिलाओं ने हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के समर्थन में खड़ी रही। इन दोनों महिलाओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के समर्थन में आवाज बुलंद किया। सिमरी बख्तियारपुर की निवासी पूनम प्रसाद ने बताया कि उन्होंने हाथों में झंडे, नारे लिखीं तख्तियां और सिर पर गांधी टोपी लगा कर अन्ना का समर्थन किया। उनका मानना है कि देश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऐसे में एक व्यक्ति हम सब के हक के लिए उठ खड़ा हुआ है। और हम सब का कर्तव्य है कि गांधीवादी अन्ना का समर्थन करें। उनका मानना है कि ये लड़ाई सिर्फ एक आदमी की नहीं है। ये देश की लड़ाई है। वहीं सिमरी बख्तियारपुर की निवासी स्नेह सौरभी ने बताया कि ये आजादी की दूसरी लड़ाई है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार देश के लिए एक अहम मुद्दा है। और आज देश को ही नहीं अन्ना जैसे लोगों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार आदमी के जन्म से ही शुरू हो जाता है और मृत्यु तक उसका साथ नहीं छोड़ता। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आजकल छोटी छोटी चीजों के लिए भी हमें पैसे देने पड़ते हैं। मंदिर में पूजा कराने से लेकर लाइसेंस बनवाने तक हर चीज के लिए पैसे देने होते हैं। बिना पैसे दिए काम आगे बढ़ता ही नहीं है। हालांकि उन्होंने बताया कि आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर चलने के लिए तैयार है। ऐसे में अगर कोई महिला भी अन्ना के साथ अनसन पर बैठती तो उन्हें ज्यादा खुशी होती। इसके अलावा उनका मानना है कि देश में भ्रष्टाचार और काले धन को रोकने में मदद मिलेगी। स्नेह सौरभी ने बताया कि देश अब इस बकैत, लठैत और डकैत सरकार से तंग आ चुकी है। आवाम की कमाई अपनी तिजोरी में भरने वालों के पास भले ही क्रूर संवेदनहीन पुलिसिया तंत्र, गोली बारूद हो लेकिन उनके सारे अत्याचार एक ऐसे शख्स के आगे फीके हैं जिसने देश के लिये अपना परिवार नहीं बसाया, जो गाँधी टोपी और बेहद कम संसाधनों के सहारे जिंदगी बसर कर रहा है। जिसके पास विचारों की ताकत है। स्नेह सौरभी ने बताया कि राम लीला मैदान से लेकर इंडिया गेट तक लोगों का हुजूम लगा था। अन्ना के समर्थन में निकली रैली में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी थे। इनमें सबसे ज्यादा युवाओं की तादाद थी। दिल्ली में हर तरफ अन्ना हजारे के आंदोलन की गूंज चल रही है। दिल्ली की सड़कों पर गांधीवादी के समर्थक तिरंगा लहराते हुए लोगों को प्रेरित करते नजर आए। समर्थकों ने भजन-कीर्तन और देशभक्ति के गीतों से एक दूसरे का उत्साह बढ़ाया।
Saturday, 27 August 2011
अन्ना के समर्थन में रामलीला मैदान पहुंची बख्तियारपुर की महिलाएं
अन्ना हजारे का अनशन जैसे-जैसे बढ़ता गया वैसे-वैसे काफिला जुड़ता गया। दिल्ली के रामलीला मैदान और इंडिया गेट पर जनसैलाब उमड़ा। देश के कोने-कोने से अन्ना हजारे के समर्थन में लोग एकजुट हो रहे हैं। वहीं भ्रष्टाचार के विरोध में सिमरी बख्तियारपुर की दो महिलाओं ने हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के समर्थन में खड़ी रही। इन दोनों महिलाओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के समर्थन में आवाज बुलंद किया। सिमरी बख्तियारपुर की निवासी पूनम प्रसाद ने बताया कि उन्होंने हाथों में झंडे, नारे लिखीं तख्तियां और सिर पर गांधी टोपी लगा कर अन्ना का समर्थन किया। उनका मानना है कि देश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऐसे में एक व्यक्ति हम सब के हक के लिए उठ खड़ा हुआ है। और हम सब का कर्तव्य है कि गांधीवादी अन्ना का समर्थन करें। उनका मानना है कि ये लड़ाई सिर्फ एक आदमी की नहीं है। ये देश की लड़ाई है। वहीं सिमरी बख्तियारपुर की निवासी स्नेह सौरभी ने बताया कि ये आजादी की दूसरी लड़ाई है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार देश के लिए एक अहम मुद्दा है। और आज देश को ही नहीं अन्ना जैसे लोगों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार आदमी के जन्म से ही शुरू हो जाता है और मृत्यु तक उसका साथ नहीं छोड़ता। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आजकल छोटी छोटी चीजों के लिए भी हमें पैसे देने पड़ते हैं। मंदिर में पूजा कराने से लेकर लाइसेंस बनवाने तक हर चीज के लिए पैसे देने होते हैं। बिना पैसे दिए काम आगे बढ़ता ही नहीं है। हालांकि उन्होंने बताया कि आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर चलने के लिए तैयार है। ऐसे में अगर कोई महिला भी अन्ना के साथ अनसन पर बैठती तो उन्हें ज्यादा खुशी होती। इसके अलावा उनका मानना है कि देश में भ्रष्टाचार और काले धन को रोकने में मदद मिलेगी। स्नेह सौरभी ने बताया कि देश अब इस बकैत, लठैत और डकैत सरकार से तंग आ चुकी है। आवाम की कमाई अपनी तिजोरी में भरने वालों के पास भले ही क्रूर संवेदनहीन पुलिसिया तंत्र, गोली बारूद हो लेकिन उनके सारे अत्याचार एक ऐसे शख्स के आगे फीके हैं जिसने देश के लिये अपना परिवार नहीं बसाया, जो गाँधी टोपी और बेहद कम संसाधनों के सहारे जिंदगी बसर कर रहा है। जिसके पास विचारों की ताकत है। स्नेह सौरभी ने बताया कि राम लीला मैदान से लेकर इंडिया गेट तक लोगों का हुजूम लगा था। अन्ना के समर्थन में निकली रैली में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी थे। इनमें सबसे ज्यादा युवाओं की तादाद थी। दिल्ली में हर तरफ अन्ना हजारे के आंदोलन की गूंज चल रही है। दिल्ली की सड़कों पर गांधीवादी के समर्थक तिरंगा लहराते हुए लोगों को प्रेरित करते नजर आए। समर्थकों ने भजन-कीर्तन और देशभक्ति के गीतों से एक दूसरे का उत्साह बढ़ाया।
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